‘कथा पंजाब’ में आपका स्वागत है ! मई 13 अंक में आप पढ़ेंगे- ‘पंजाबी कहानी : आज तक’ के अन्तर्गत पंजाबी के प्रख्यात लेखिका अजीत कौर की एक प्रसिद्ध कहानी 'एक और फालतू औरत', ‘आत्मकथा/स्व-जीवनी’ के अन्तर्गत पंजाबी के वरिष्ठ लेखक प्रेम प्रकाश की आत्मकथा ‘आत्ममाया’ की अगली कड़ी तथा ‘पंजाबी उपन्यास’ के अन्तर्गत बलबीर सिंह मोमी के उपन्यास ‘पीला गुलाब’ की 15वीं किस्त …

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संपादकीय

>> शनिवार, 12 मई 2012










पंजाबी की नई कथा-पीढ़ी : अपार सम्भावनाएँ
किसी भी भाषा के साहित्य को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी नई पीढ़ी के लोगों पर टिकी होती है…पर प्रश्न यह है कि नई पीढ़ी में कितने युवाओं को अपनी माँ-बोली और साहित्य से प्रेम है। वैश्वीकरण और बाज़ारवाद के इस दौर ने सबसे अधिक युवा पीढ़ी का जो नुकसान किया है, वह है उसे उसकी अपनी भाषा, संस्कृति और साहित्य से दूर किया जाना… रोजगार की अनिश्चिता से युवा पीढ़ी का हर नौजवान भयभीत है… उच्च शिक्षा प्राप्त नौजवान भी अपनी जवानी और अपनी ऊर्जा पैकजों में खपा रहे हैं और दुख की बात यह है कि रोजगार के स्थायीत्व का कोई भरोसा नहीं है। विश्वस्तर पर चलती मंदी के चलते कब, किस समय उन पर गाज गिर जाए, कोई नहीं जानता। ऐसे अनिश्चित और भय भरपूर भविष्य वाले समय में नौजवान पीढ़ी में से जब कुछ नौजवान अपनी तमाम चिंताओं, संघर्षों के बीच जब अपनी भाषा और साहित्य में रूचि दिखलाते हैं तो नि:संदेह एक सुखद अनुभूति का होना एक स्वाभाविक बात है… पंजाबी कहानी की एक मजबूत विरासत रही है…अग्रज लेखकों ने पंजाबी कहानी को एक मजबूत आधार दिया है… अनेक नाम हैं… यही मजबूत विरासत नये लोगों को अपनी ओर खींचती रही है। पर नौजवान पीढ़ी के सामने अपने समय का कटु यथार्थ होता है जिससे जूझता हर नया लेखक अपनी एक नई दृष्टि विकसित करता है और जब वह लेखन में उतरता है तो विरासत में मिले खजाने से आगे जाने की ललक भी उसकी आँखों में होती है। यह खुशी की बात है कि पंजाबी की नई कथा पीढ़ी के लेखक महज शौकिया लेखन नहीं कर रहे हैं, वह लेखन के महत्व को गंभीरता से समझते हैं और अपने समय और समाज की सच्चाइयों से जूझते हुए कुछ नया और हटकर सृजित करना चाहते हैं। जिंदर, तलविंदर, सुखजीत, जतिंदर सिंह हांस, अजमेर सिद्धू, देसराज काली, जसवीर सिंह राणा, बलजिंदर नसराली, वीना वर्मा, सुरिन्दर नीर, भगवंत रसूलपुरी, गुरमीत कड़ियालवी, बलदेव सिंह धालीवाल, गुलजार मुहम्मद गौरिया, महिंदर सिंह कांग, केसरा राम, अनेमन सिंह, कुलवंत गिल, बलविंदर सिंह बराड़ कुछ ऐसे ही नाम हैं जो अपनी रचनाशीलता से पंजाबी की नई कहानी को एक नया मुकाम देने की कोशिश में संलग्न दीखते हैं।  
 हिंदी की प्रसिद्ध कथा पत्रिका कथादेश का जब जुलाई 2000 में पंजाबी कहानी विशेषांक आया तो उसमें मेरी यह पूरी कोशिश रही थी कि यदि पंजाबी कहानी का मुकम्मल चेहरा हिंदी पाठकों के सम्मुख रखना है तो पुरानी अग्रज पीढ़ी के कथाकारों के साथ-साथ बिल्कुल नई पीढ़ी के कथाकारों की कहानियों को भी शामिल किया जाए। तब देशराज काली, जिंदर, सुखजीत, भगवंत रसूलपुरी, बलदेव सिंह धालीवाल, अजमेर सिद्धू, गुरमीत कड़ियालवी, तलविंदर सिंह, अवतार सिंह बिलिंग, बलजिन्दर नसराली, वीना वर्मा की कहानियों को पाठकों ने बहुत पसन्द किया था। अभी हाल में कथादेश(मई 2012) का भारतीय किसान समस्या पर एक अंक संपादित होकर आया है जिसका अतिथि संपादन सुभाष चन्द्र कुशवाहा ने किया है। इस अंक में भी पंजाबी की नई कथा पीढ़ी के दो लेखकों बलजिंदर नसराली और बलविंदर सिंह बराड़ -  की पंजाब के किसान संकट पर लिखी गई दो कहानियों का हिंदी अनुवाद[अगर अपनी व्यथा कहूँ और सन्नाटा] प्रकाशित हुआ है जो यह सिद्ध करता है कि पंजाबी की नई कथा-पीढ़ी अपने समय और सरोकारों से जूझते हुए कितनी चैतन्य और जागरूक है।
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इस अंक में आप पढ़ेंगे
-पंजाबी कहानी : आज तक के अन्तर्गत पंजाबी के इसी प्रख्यात लेखक संतोख सिंह धीर की प्रसिद्ध कहानी कोई एक सवार
-पंजाबी कहानी : नये हस्ताक्षर के अन्तर्गत बलजिंदर नसराली की कहानी अगर अपनी व्यथा कहूँ
-आत्मकथा/स्व-जीवनी के अन्तर्गत पंजाबी के वरिष्ठ लेखक प्रेम प्रकाश की आत्मकथा आत्ममाया को अगली किस्त, और
-बलबीर मोमी के उपन्यास पीला गुलाब की अगली किस्त…

आप के सुझावों, आपकी प्रतिक्रियाओं की हमें प्रतीक्षा रहेगी…
सुभाष नीरव
संपादक - कथा पंजाब  

2 टिप्पणियाँ:

बेनामी 17 मई 2012 को 7:08 pm  

भाई नीरव,

पंजाबी साहित्य की नई पीढ़ी अपनी भाषा और साहित्य के प्रति जितना गंभीर है वह प्रशंसनीय है. मैं तुम्हारी बात से बिल्कुल सहमत हूं. लेकिन क्या कारण है कि हिन्दी का नया लेखक उसका दशांस भी गंभीर नहीं है. वह जोड़-जुगाड़ में लगा है. उसका साहित्य इतना अपठनीय है कि हिन्दी पाठक साहित्य से दूर होता जा रहा है. ऎसी स्थिति में पंजाबी के युवा लेखक हिन्दी के लिए एक नज़ीर बन सकते हैं. एक अच्छे संपादकीय के लिए बधाई.

रूपसिंह चन्देल

बेनामी 17 मई 2012 को 7:08 pm  

भाई नीरव जी
कथा पंजाब का ताला अंक मि‍ला। आपकी मेहनत के लि‍ए सदा प्रणाम करता रहा हूं।

आपका
एस आर हरनोट

‘अनुवाद घर’ को समकालीन पंजाबी साहित्य की उत्कृष्ट कृतियों की तलाश

‘अनुवाद घर’ को समकालीन पंजाबी साहित्य की उत्कृष्ट कृतियों की तलाश है। कथा-कहानी, उपन्यास, आत्मकथा, शब्दचित्र आदि से जुड़ी कृतियों का हिंदी अनुवाद हम ‘अनुवाद घर’ पर धारावाहिक प्रकाशित करना चाहते हैं। इच्छुक लेखक, प्रकाशक ‘टर्म्स एंड कंडीशन्स’ जानने के लिए हमें मेल करें। हमारा मेल आई डी है- anuvadghar@gmail.com

छांग्या-रुक्ख (दलित आत्मकथा)- लेखक : बलबीर माधोपुरी अनुवादक : सुभाष नीरव

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पंजाबी की चर्चित लघुकथाएं(लघुकथा संग्रह)- संपादन व अनुवाद : सुभाष नीरव

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रेत (उपन्यास)- हरजीत अटवाल, अनुवादक : सुभाष नीरव

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कथा पंजाब(खंड-2)(कहानी संग्रह) संपादक- हरभजन सिंह, अनुवादक- सुभाष नीरव

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ज़ख़्म, दर्द और पाप(पंजाबी कथाकर जिंदर की चुनिंदा कहानियाँ), संपादक व अनुवादक : सुभाष नीरव

ज़ख़्म, दर्द और पाप(पंजाबी कथाकर जिंदर की चुनिंदा कहानियाँ), संपादक व अनुवादक : सुभाष नीरव
प्रकाशन वर्ष : 2011, शिव प्रकाशन, जालंधर(पंजाब)

पंजाबी की साहित्यिक कृतियों के हिन्दी प्रकाशन की पहली ब्लॉग पत्रिका - "अनुवाद घर"

"अनुवाद घर" में माह के प्रथम और द्वितीय सप्ताह में मंगलवार को पढ़ें - डॉ एस तरसेम की पुस्तक "धृतराष्ट्र" (एक नेत्रहीन लेखक की आत्मकथा) का धारावाहिक प्रकाशन…

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'कथा पंजाब’ के स्तम्भ ‘नई किताबें’ के अन्तर्गत पंजाबी की पुस्तकों के केवल हिन्दी संस्करण की ही समीक्षा प्रकाशित की जाएगी। लेखकों से अनुरोध है कि वे अपनी हिन्दी में अनूदित पुस्तकों की ही दो प्रतियाँ (कविता संग्रहों को छोड़कर) निम्न पते पर डाक से भिजवाएँ :
सुभाष नीरव
372, टाइप- 4, लक्ष्मीबाई नगर
नई दिल्ली-110023

‘नई किताबें’ के अन्तर्गत केवल हिन्दी में अनूदित हाल ही में प्रकाशित हुई पुस्तकों पर समीक्षा के लिए विचार किया जाएगा।
संपादक – कथा पंजाब

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‘कथा पंजाब’ के आगामी अंक में आप पढ़ेंगे –‘पंजाबी कहानी : आज तक’ में पंजाबी के प्रख्यात लेखक गुलजार सिंह संधु की कहानी, ‘आत्मकथा/स्व-जीवनी’ के अन्तर्गत पंजाबी के वरिष्ठ लेखक प्रेम प्रकाश की आत्मकथा ‘आत्ममाया’ की अगली कड़ी और बलबीर मोमी के उपन्यास ‘पीला गुलाब’ की अगली किस्त…

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